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जिंदगी प्यार है

जिंदगी क्या है? जिंदगी प्यार है, दर्द है, विश्वास है, जिंदगी इजहार है, मर्ज है, एहसास है। कुछ अंजाना सा अल्फाज है, ज़िन्दगी! जिंदगी रब है, गर रब है, तो सब है, बाकी सब एक ख्वाब है, जिंदगी! एक अनजाने एहसास से बंधी है यह दुनियां। जो हमारे हमराज हैं, हमसफर हैं, हमनवाब हैं। जिंदगी के दर्द ही सुकून है, बस उन्हें अपनाने का जुनून होना चाहिए। प्यार एक खुशी है, जो हमारे लिए ही बनी है, उन्हें गले लगाने का फितूर होना चाहिए। जिंदगी है तो प्यार है और प्यार है तो जिंदगी है इसे समझने का सुरूर होना चाहिए। रब की इच्छा है प्यार हमारी परीक्षा है प्यार इस पर हमें गुरूर होना चाहिए। जिंदगी के कण-कण में बसा है प्यार इसकी मर्यादा को बनाए रखना यही सच्चे प्रेमियों का ज़मीर होना चाहिए। होते हैं आशिक़ अनेक इस जहां में जो सच्चे प्यार को समझें ऐसे होते हैं शायद बस एक इस जहां में। प्यार से विपत्ति है, आपत्ति है परेशानी है, नाकामी है दुख है, तकरार है पर जो न समझे हैं कि ये बस प्यार के एक प्रकार है शायद उन्होंने जिंदगी में न किया कभी सच्चा प्या...

रेल

झुग झुग करती रेल आई, सब बच्चों में खुशियां छाई। एक ने सबको पास बुलाया, पास बुला कर या बतलाया। मैंने की हैं रेल की सवारी, उस से देखी दुनियां सारी। झरने नदियां पहाड़ को देखा, फूलों के  बहारों को देखा। सरपट सरपट आती रेल, सरपट सरपट जाती है। सबको खूब घूमाती है, सबका दिल बहलाती रेल। जब भगवान ने कृपा बरसाई, एक मानुष को बुद्धि आयी। उसने बना डाली एक रेल, जो हम सब की है प्यारी रेल। विज्ञान की खोज में आई, लोगों की सोच में छाई। जिस दिन दुनिया में आई, लोगों ने की बहुत बढ़ाई। जाए स्टीवेन्सन महान था, जिस पर लोगों को अभिमान था। जिसने यह रेल बनाई, हर जन के जो काम आई। तुम सब भी करना ऐसा काम, जिससे पहुंचे जन-जन को आराम। तुम पर लोग अभिमान करेंगे, उस काम गुणगान करेंगे।                   🗒️🖋️🖋️🖋️  शिवमणि"सफ़र"(विकास)

बारिश के बाद

बारिश के बाद मेढ़को की आवाज क्या कभी सुना है आपने टर्र टर्र टर्र। बारिश के बाद बहती हुई हवा को क्या कभी महसूस किया है आपने कितनी शीतल होती है। बारिश के बाद झूमते हुए पेड़ों को क्या कभी देखा है आपने कितने मन्द में गति से झूमते हैं। बारिश के बाद मिट्टी की खुशबू क्या कभी सूंघा है आपने कितनी मनमोहक होती है। बारिश के बाद घोंसलों से पक्षियों की आवाज क्या कभी सुना है आपने चूं चूं चीं चीं। बारिश के बाद हरे भरे खेत खलियानों को क्या कभी देखा है आपने हरियाली के गीत गुनगुनाते हैं। बारिश के बाद क्या कभी महसूस किया है अपने चारों तरफ के वातावरण को कितना शांत होता है। बारिश के बाद क्या कभी देखा है आपने नीले-नीले अंबर को कितना प्यारा लगता है।                   🗒️🖋️🖋️🖋️ शिवमणि"सफ़र"(विकास)

लिखने एक नयी कहानी को

चल पड़ी है ऐ जिंदगी, तू लिखने एक नयी कहानी को।। मगर आगे खड़ी है मुश्किलें, तेरी सारी हस्ती मिटाने को। पर तू मिटा देना इन मुश्किलों को, अपने हौसलें रूपी हथियार से। क्योंकि चल पड़ी है ए जिंदगी, तू लिखने एक नयी कहानी को।। तुझें हर पल रोंना पड़ेगा, तुझें अपनों को खोना पड़ेगा। रोते-रोते सूख जाएंगे तेरे आंखो के आंसू, चलते चलते पड़ जाएंगे तेरे पैरों में छाले। क्योंकि चल पड़ी है ऐ जिंदगी, तू लिखने एक नयी कहानी को।। कभी टूटते हुए नजर आएंगे तेरे सपने, सभी रूठते हुए नजर आएंगे तेरे अपने। एक दिन छोड़ देंगे ये दुनियां वाले तेरा साथ, पर तू कभी घबराना मत होकर निराश। क्योंकि चल पड़ी है ऐ जिंदगी, तू लिखने एक नयी कहानी को।। लाख समस्याएं आएं, फिर भी तेरे कदम न डगमगाए। ये विश्वास बना ले तू, बाकी छोड़ सारी कहानी तू। क्योंकि चल पड़ी है ऐ जिंदगी, तू लिखने एक नयी कहानी को।। पराये हो जाएंगे हर अपने, टूट जाएंगे तेरे हर सपने। रूठ जाएगी तुझसे ये दुनियां फिर भी भुला देना तू इनकी कमियां। क्योंकि चल पड़ी है ऐ जिंदगी, तू लिखने एक नयी कहानी को।। तेरी जवानी तुझे लालच दिखाएगी...

है ये इलाहाबाद

खुशियों का समुंदर है ये इलाहाबाद, एक नटखट सा बंदर है ये इलाहाबाद, जगत में निराला है यह ये इलाहाबाद, सभी को प्यारा है ये इलाहाबाद। पतली गलियां और ऊंचे मकान, छाई रहती है सदा यहां मुस्कान, कोई दिन में ही तारे गिन रहा है, कोई मंजिल का रास्ता नाप रहा है। किसी की सांसे अटकी सी पड़ी है, कोई बसंत बहार का आनंद ले रहा है कोई दौड़ा जा रहा है पैसों के पीछे, कोई राम नाम में जीवन बीता रहा है। बड़े अजीब लोग रहते हैं यहां पर, सब के दिलों के करीब रहते हैं यहां पर, कोई खून का रिश्ता नहीं है इनके बीच, भाईचारे के आगे कोई टिकता नहीं है इनके बीच। रिक्शे की रफ्तार, सावन की बौछार, गंगा का किनार, यहां के लोगों का प्यार, सभी को यहां का दीवाना बना देता हैं इस शहर की कुछ आदत है ऐसी कि सब को अपना बना लेता है। कोई पैदल चलते हुए ही हाफ जाता है, तो कोई दौड़कर पूरा रास्ता नाप जाता है, ऐसे भी विचित्र लोग रहते है यहां पर कोई दूसरे के मन को भी भांप जाता है। कुंभ का मेला हो, या फुल्की का ठेला हो, हमेशा भीड़ रहती है यहां, चाहे जितना झमेला हो। जितना घूमोगे इसकी गलियों में, मन की लालसा ब...

बचपना

वो बचपन के दिन, वो बचपन की रातें, अब तो हो गई हैं, सब गुजरी हुई बातें। रातों की चांदनी से चमकता था आंगन, दिन के उजाले में चमकता था आंगन। क्या वो दिन थे, खाना खाते, गाना गाते, मिलकर खूब धूम मचाते, कभी हंसाते, कभी रुलाते। न जिम्मेदारीयां थी, ना बंधन था, सबके चंचल मन, खुला आंगन था। डर था तो प्यार भी जो हमारा खुशियों का संसार था। कितने हंसी थे वो दिन, कितनी हंसी थी वो रातें, बस अब रह गई है, वो सब चिकनी-चुपड़ी बातें। जब याद आते हैं वो दिन, हम भूल जाते हैं खुद को। चले जाना चाहते हैं उस बचपन में, जो था कभी हमारे दिल के आंगन में। चंदा हमसे अठखेलियां करता, रातों को  ठिठोलियां करता, दिनकर हंसी धूप से हमारे खुशियों की झोलियां भरता। कब दिन बीता, कब रात बीती, ना जाने कितनी बरसात बीती। भूल गए हम बचपन को गुजरी हुई रात की भांति। ठंडी हवाओं के फुहारे, सुबह-शाम के वो नजारे, उड़ जाते हैं धूल के संग, बन जाते हैं अतीत के अंग। अब वो बीता जमाना हुआ, बचपना हमसे बेगाना हुआ, यादों के दर्पण में बिम्ब सा गुजरा हुआ अफसाना हुआ।         ...

स्त्री तू कौन है

स्त्री तू कौन है तू क्यों मौन है रह तू मौन देखता हूं तेरा पक्ष लेता है कौन किस पर भरोसा करके बैठी है तु इन नामर्दो पर ये क्या तुझे पहचान दिलाएंगे जो खुद को ही नहीं पहचानते वो क्या तुझे पहचानेंगे तुझे खुद को पहचानना होगा अब बदलना होगा तुझको बदलाव का रास्ता तू पकड़ चल तू होकर बेखबर इज्जत, शोहरत धर्म-दान, मान-सम्मान प्रेम दया ममता क्षमा शील क्षमता जो भी है तेरा तू रख अपने पास न हो उदास, न हो निराश तुझमें कम न हो विश्वास कस ले कमर होकर निडर बदलाव की राह को पकड़ चल तू, आगे बढ़ तु धीरे ही सही पर पग धर तु बदल अपनी चाल कर तु नया कमाल अब तक तु शांत थी करुणा तेरी प्रधान थी पर क्या हुआ उस करूणा का जो तेरी पहचान थी तेरी उसी करुणा का ये निर्लज्ज फायदा उठा रहे हैं तु इसकी सीमा को घटा न कि तु इसको मिटा क्योंकि यही तेरी पहचान है यही तेरी मुस्कान है यही तेरा ईमान है यही तेरा सम्मान है पर सिर्फ इसी के सहारे मत तु चलना बदलाव की राह को होगा पकडना क्योंकि ये नामर्द तुझे इच्छापूरक समझते हैं तुझे ये निर्जिव मूरत समझते हैं अब जवाब दे तु तू ना चाह पर भी तुझे दे...