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Showing posts from September, 2019

एक संदेश

मैं हूं कठोर पत्थर, तुम हो सुकुमार फूल| टूटूंगा मैं तो बिखर जाऊंगा, पर तुम्हारा नामो-निशां नहीं| मैं रहूंगा अस्तित्व-युक्त, तुम हो जाओगे अस्तित्व विहीन| मेरा प्रभाव बना रहेगा, तुम हो जाओगे प्रभाव-हीन| अपने कण-कण को संयुक्त कर, मैं ले लूंगा एक नया आकार| पर क्या तुम कर सकोगे अपना कोई रूप साकार|  बनो कठोर पत्थर  से तुम,     जरूरत पड़े तो बिखर भी जाओ| पर न लो तुम ऐसा आकार, समय आने पर निखर न पाओ|                   🗒️🖋️🖋️🖋️  शिवमणि"सफ़र"(विकास)

एक जीव

आज वह फिर आया था मेरे कमरे में, छुपे हुए चोरों की तरह, मुझे देखते ही भाग जाता है, बेलगाम घोड़ों की तरह। पता नहीं क्यों डरता था, कि मैं जैसे कोई निर्दयी शक्स हूं। उसे बताना चाहता था कि मैं भी उसी तरह अक्स हूं। शायद उस दिन की तस्वीर, आज भी कैद है, उसकी नजर में, मैं कर्कश आवाज में भगा रहा था उसे, वह डरा-सहमा किताबों में छिप गया। फिर भी मैंने उसे ढूंढ कर भगा दिया, मैं निर्दयी हूं ऐसा उसके दिल में घर कर गया। न उससे मेरा कोई द्वेष था ना कोई शत्रुता, बस मैं करना चाहता था अपनी वस्तुओं की रक्षा। पर मेरी किताबों को उसने न कभी कुतरा, इसी बात से वह मेरे दिल में उतरा, मैंने न उसे कभी मारा न ही दुतकारा, क्योंकि वह भी एक जीव था और मैं भी।                                    🗒️🖋️🖋️🖋️शिवमणि"सफर"(विकास)

देश की बात

गूंज जाता है दुनियां का हर कोना, मैसेज, व्हाट्सएप, फेसबुक, टि्वटर, रिश्ता नाता घर और परिवार, जाना अंजाना और बेगाना। देते हैं सब लोग हर साल, जनवरी में नववर्ष की बधाई, भूल जाते हैं वो लोग शायद, भारत के नव वर्ष की लड़ाई। नफरत की मंशा नहीं है दोस्त, देश की प्रतिष्ठा की बात है, मनाओं हर धर्म के त्योहार, पर अपने देश के गीत याद रहे। देश भक्त का कर्तव्य निभाओ, भारत के अस्तित्व को बचाओ, तब तुम कहलाओगे सच्चे देशभक्त, बाकी सब दिखावा है, छलावा है।                  🗒️🖋️🖋️🖋️शिवमणि"सफर"(विकास)