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देश का कर्ज

देश का कर्ज बहुत है हम पर, उसको कौन चुकाएगा। देश ने हम पर सब कुछ वारा, उसको कौन भर पायेगा । क्रांतिकारियों के लहू की निशा, भला कौन मिटा पाएगा। वीरों के सर-जमीन के ऊपर, भला कौन नजर टिकायेगा। महापुरुषों ने अपनी जान लुटाई, तो हमने एक नई जिंदगी पायी। वीरों ने अपना बलिदान दिया, तो इस देश ने आजादी पाई। बोस ने त्यागा हमारे लिए, अपनी खुशी अपना घर-बार। देश के आजादी के लिए, कर दिया अपना जीवन कुर्बान। भगत  चढ़ गए फांसी पर, करने हम सबका उद्धार। उनके इस बलिदान से, जन्मे भगत हजार। निकल पड़े सपूत भारत माता के, हाथों में लेकर हथियार। आजादी के लिए किया निछावर, अपना तन मन धन घर-बार। जिस दिन आए जनसामान्य आगे, शक्ति बढ़ी देश की कई हजार। अबलाओं ने भी आगे आकर, दिखाया अपना नया अवतार। तब जाकर सांस में सांस आई, जिस दिन खत्म हुई लड़ाई। देश ने  लहराया अपना झंडा, उस दिन खुशियों की बहार आई।                   🗒️🖋️🖋️🖋️  शिवमणि"सफ़र"(विकास)

डर

आया मेरे ज़हन में ठहरा मेरे मन में कर दिया मुझे बेहाल जो न आया कई साल बन कर आया भूचाल पहले तोड़ा मेरा विश्वास फिर छिना मेरा श्वास मैं तड़पने लगा जलहीन मछली की तरह मैं पल भर के लिए भूल गया कि मेरा भी कोई अस्तीत्व है। डरता रहा मैं चलता रहा मैं डरते डरते पग धरता रहा मैं कदम बढ़ाने से पहले मुस्कुराने से पहले दिल संभल जाने को कहता आज तक मैं न समझ  सका आखिर डर क्या चीज़ है। न रंग है न रूप है न ही कोई स्वरुप है पहले तोड़ता है विश्वास फिर नचाता है अपने हाथ आज के पहले न जाने कब आया था पर इतनी तबाही पहले न मचाया था। कर दिया मुझे मजबूर तोड़ दिया मेरा गुरुर आंख खोलने से भी डरता था मैं कुछ बोलने से भी पहले संभलता था मैं टूट चुका था मैं खुद से रुठ चुका था मैं। न कोई चाह थी न कोई राह थी जिंदगी मेरी गुनाह थी। गुनाह ही तो थी जो मैं डरता रहा फिसलने के डर से संभलता रहा जिंदगी की राह में धीरे धीरे पग धरता रहा क्यों नहीं समझा मैं दुनिया की गति है तेज़ अभी यहां है तो पल भर में न जाने कहां दौड़ना तो पड़ेगा मुझे नहीं तो फिर छूट जाऊंगा खो जाऊंगा ब...

मतलब का खात्मा

ये मतलब की दुनियां, ये मतलब के लोग, ये मतलब की इज्जत, ये मतलब की शोहरत। ये मतलब के घर, ये मतलब के परिवार, ये मतलब के कार्य, ये मतलब के व्यवहार। यह दुनियां है सिर्फ मतलबी, इसीलिए दुनिया में मची है खलबली, है जो यह मतलब की आग, कर देगी यह हम सब को राख। मिटाना होगा इस मतलब को, ना की मतलबी लोगों को, भूलना होग हमें स्वार्थ को, न की स्वार्थी लोगों को। ढूंढ रहे हैं लोग उसे, दुनिया के हर कण में, पा न सके वह लोग उसे, किसी भी परमाणु में। वह छुपा है उस घर में, जो निर्मित है मन में, नष्ट करो हथियार से, जो निर्मित है प्यार से। बस एक पश्चाताप करो अपने मन को साफ करो जिस दिन मन साफ हो जाएगा दुनिया से मतलब मिट जाएगा|                   🗒️🖋️🖋️🖋️  शिवमणि"सफ़र"(विकास)

हे! यात्री

ही अनंता की यात्रा पर निकले हुए यात्री, तुम क्यों निरुद्देश्य देश इन गलियों में भटक रहे हो, इस काल्पनिक दुनिया में तुम क्यों स्वयं को भूले जा रहे हो, तुम स्वयं को पहचानो, नहीं तो तुम भी खो जाओगें, एक दिन इन्हीं नज़रों में, तुम्हें कल भूल जाएंगे यह दुनिया वाले, और कल तुम छप जाओगे इतिहास के पन्नों पर, तब तुम ना कुछ सोच सकोगे, ना तुम कुछ बोल सकोगे, और ना ही कुछ तुम कर सकोगे, इसीलिए तुम्हें जो भी करना है, आज ही उसकी शुरूआत करो, एक नए सपने का आगाज करो, खुद पर तुम विश्वास करो, एक दिन वह दिन भी आएगा, जब तुम इन पत्थरों में, हीरो की तरह चमको गए, तुम्हारे इस दुनिया से चले जाने के बाद, तुम्हारे सपनों को यह दुनिया ही पूरी करेगी, तब तुम्हें इतिहास के पन्नों पर नहीं, उन सपनों में पुनः जीवित हो जाओगे, और जब तक तुम्हारा सपना पूरा नहीं होगा, तब तक तुम लोगों के विचारों में जिंदा रहोगे।                   🗒️🖋️🖋️🖋️  शिवमणि"सफ़र"(विकास)

ये दुनियां

यह दुनिया है एक माया जंजाल, यही रहोगे तो इसने जल जाओगे, निकलना चाहोगे इसके पार, तो प्रयासों में निकल जाओगे। बस तुम्हें स्वयं को ढूंढना होगा, इस माया जंजाल को तोड़ना होगा, एक बार टूट गया माया जंजाल, तो तुम पा जाओगे अपना आकार। देख कर तुम अपना रूप निखर जाओगे,  मिलकर स्वयं से खुशी से भर जाओगे।                   🗒️🖋️🖋️🖋️  शिवमणि"सफ़र"(विकास)

एक शिकारी

निकल पड़ा एक वनवासी, लेकर अपने हाथ में लाठी, दौड़ लगाया शिकार के खातिर, पर हाथ ना आया कोई शातिर। थककर वह बैंठा पेड़ की छांव, क्योंकि काम ना आया कोई दांव, एक हवा का झोंका आया, उसको एक सपने में सुलाया। सपने में एक दयावान था, जैसें वह एक भगवान था, उसके जनों को पास बुलाया, मेरे उनको एक संदेश सुनाया। मेरे प्यारे नगर के वासी, बनो तुम एक निश्चल अभिलाषी, गाना तुम सब प्रेम के गीत, भूल न जाना तुम यह रीत। बनना तुम सब सदाचारी, भूल न जाना मानवता-सारी, यह सब है बनाते दुनिया की तकदीर, जैसा करेगा वैसा भरेगा वह वीर। इस दुनिया में सदा रहेंगे दीन, भूल न जाना होकर कर करुणा विहीन, तुम्हें बताता हूं एक राज की बात, मैं उन दिनों में करता हूं वास। जो होगा सिर्फ धन का अनुचारी, उस पर आएगी विपदा बड़ी भारी, धन की सबसे बड़ी बीमारी, होता नहीं वह कभी सुखकारी। इस ज्ञान का प्रचार करो, इसका तुम स्वयं व्यवहार करो, मन को शांति मिलेगी संस्कार में, सारी खुशियां होगी संसार में। जब टूटा उसका सपना प्यारा, उठ बैठा वह बेचारा, फेंक दिया उसने हथियार, आंखों से निकली अश्रुधार। ...

बारिश

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बारिश आई,बारिश आई, सब बच्चों में खुशियां छाई, घुमड़-घुमड़ कर बादल आए, पवन के झोंके संग मिलाएं। रिमझिम-रिमझिम बरसा पानी, सब बच्चों ने कही जुबानी, उछल कूद कर हम नाचेंगे, दादा हम सबको क्यों डाटेगें। भीगते हुए पापा घर पर आए, हम सब के लिए जामुन लायें, सब बच्चों ने जामुन खाया, मिलकर सबने धूम मचाया। सब बच्चों ने नाव बनाया, नावको सबने जल में बहाया, उस पर बैठाया एक बुड्ढा बुड्ढी, आगे हम को मिल गई एक बुड्ढी। उसने हम सबको समझाया, बीमारी से हम को डराया, हम सब  दौंडकर घर पर आए, दादी को सब बात बताएं। उन्होंने बोला प्यारे बच्चों, तुम सब हो दिल के सच्चें, आओ तुम्हें मैं एक बात बताऊं, बीमारी को तुम सबसे दूर भगाऊं। तुम सब प्रतिदिन सुबह नहाओ, सुबह नहाकर विद्या मंदिर जाओ, तुम सब प्रतिदिन विद्या मंदिर जाओगे, तो तुम सब ज्ञानी बन पाओगे। ज्ञान से तुम गुणवान बनोगे, देश की पहचान बनोगे, सब तुम्हारे गुण गायेंगे, तुम्हारे ही गुण अपनाएंगे।                   🗒️🖋️🖋️🖋️  शिवमणि"सफ़र"(विकास)